समझौता या प्यार-
प्रिया दिल्ली के कॉलेज में पढ़ती थी, वो कॉलेज पढ़ने जाती थी या घूमने,ये बात खुद प्रिया को नहीं मालूम था. क्योंकि क्लास से ज्यादा तो वो कॉलेज के कैंपस में इधर-उधर घूमने में बिताती थी.सिर्फ परीक्षा के समय पढ़ती थी,बाकि साल बस घूमना और मस्ती करना,उसका मानना था की जब तक अकेले हो,कॉलेज का समय है मस्ती कर लो,फिर तो शादी के बाद बंध ही जाना है, ना ही कोई मस्ती ना ही कोई आजादी,सिर्फ घर,पति फिर बच्चे. प्रिया देखने में भी बहुत सुन्दर थी, जो उसे देखता,देखता ही रह जाता, खुली विचारधारा की और बिलकुल स्वछन्द, आजादी पसंद लड़की, लड़को के साथ घूमना, और उसका ड्रेस भी लड़को ही जैसा था, या यूँ कह ले की प्रिया अपने आपको लड़की नहीं मानती थी,भले उसके दिलो-दिमाग ये था की कल जब उसकी शादी हो जाएगी तो उसका घूमना,स्वछंद रहना सब बंद हो जायेगा,लेकिन वो सोचती थी की कल की कल देखी जाएगी,आज क्यों बर्बाद करना,इसलिए वो आज में जीती थी.लड़के ही उसके दोस्त थे और लड़को के साथ ही वो घुमा करती थी.शायद इसलिए भी वो क्लास से जयादा कैंपस में नजर आती थी, वैसे तो उसके बहुत सारे दोस्त थे,लेकिन उन दोस्तों में उसे अनिल बहुत पसंद था,क्योंकि अनिल देखने में स्मार्ट था और काफी पैसे वाला था. उसके पापा व्यवसायी थे, वो हमेशा कार से कॉलेज आता था,और प्रिया को अक्सर घुमाने भी ले जाया करता था, वहीँ प्रिया के ही साथ पढ़ने वाला अजय भी प्रिया को बहुत चाहता था, एवरेज दिखने वाला अजय बाइक से कॉलेज आता था, क्योंकि उसके पापा अमीर नहीं थे, इसलिए वो अमीर नहीं था,भले दौलत से अजय अमीर नहीं था,लेकिन पढ़ाई में हमेशा अव्वल आता था, और उसे यकीं था की एक दिन वो अपने दम पर एक बड़ा और पैसे वाला आदमी बन जायेगा.अजय प्रिया को दिलो जान से प्यार करता था,ये बात प्रिया को भी मालूम थी, अजय हमेशा पढ़ाई में उसकी मदद करता था,यहाँ तक की अजय के दम पर ही वो परीक्षा भी पास करती थी, इसलिए प्रिया की जिंदगी में फ़िलहाल दो लड़के बहुत ही करीब थे,एक अनिल और दूसरा अजय. प्रिया को खुद समझ में नहीं आ रहा था की वो अजय से प्यार करे या फिर अनिल से.इसलिए वो दोनों से प्यार करती थी,जब मौका मिले अजय के साथ रहती या फिर अनिल के साथ. हलाकि अजय चाहता था की प्रिया उसकी बन कर रहे लेकिन वो जानता था की प्रिया अनिल को नहीं छोड़ सकती, क्योंकि प्रिया का खर्चा अनिल ही चला रहा था,और अजय के पास इतना पैसा नहीं था की वो प्रिया का खर्चा उठा सके, इसलिए उसे अपना मन मारना पड़ रहा था, वैसे अजय के जिंदगी में और कई लड़किया आना चाहती थी,लेकिन अजय को अपने प्यार पर पूरा विश्वास था की एक दिन प्रिया उससे प्यार करेगी,इधरअनिल प्रिया के अलावे भी लड़कियों के साथ व्यस्त रहता था.
एक दिन हिम्मत करके अजय ने प्रिया के सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया,ये सुन कर प्रिया कुछ देर खामोश रही फिर उसने बोला की, उसे सोचने का वक्त दे,तब तक वो उसकी दोस्त तो है ही और दोस्त बन कर रहेगी. अजय मान गया,ये बात जब अनिल को पता चली तो दूसरे ही दिन अनिल ने भी अपने प्यार का इजहार प्रिया से कर दिया, अब तो प्रिया की समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? क्योंकि जब तक दोनों दोस्त थे,प्रिया को कोई समस्या नहीं थी,लेकिन जब प्यार की बात आयी तो उसे दोनों में से एक को चुनना होगा, जो उसके लिए काफी समस्या कर रहा था, वो किसे चुने और किसे मना करे उसकी समझ में नहीं आ रहा था, क्योंकि दोनों ने अपने प्यार का इजहार किया था, एक तरफ अजय जिसके पास ना पैसा ना ही खूबसूरती और ना ही जीवन में कोई और लड़की. दूसरी तरफ अनिल जिसके पास पैसा, खूबसूरती भी और जीवन में लड़किया भी. प्रिया ने दोनों से सोचने का समय मांग लिया और सोचने लगी, वो किस्से प्यार करे और किसे मना कर दे? जिसे भी मना करती उसके साथ उसका रिश्ता खराब होता और वो कभी ऐस नहीं चाहती थी, शायद इसलिए वो दोनों के साथ रहती थी, एक दिन तो प्रिया के दोस्तों को ये देख कर ताजुब हुआ की अनिल ने कार से प्रिया को कॉलेज में ड्राप किया और कार में ही प्रिया ने अनिल को किश किया ,और दूसरी तरफ जब कार वापस चली गयी और अजय उसके करीब आया तो प्रिया उसे भी किश किया,मतलब साफ़ था की प्रिया दोनों को नहीं छोड़ना चाहती थी, वो दोनों के साथ रिश्ता निभा रही थी,लेकिन आखिर कब तक प्यार समझोता बन कर रहता, वो कहते हैं ना प्यार दिल से होता है ना की समझोता से , एक दिन अनिल ने प्रिया को अजय को किश करते देख लिया,अनिल बहुत गुस्सा हुआ और वो प्रिया को भला बुरा कहने लगा, जिसके बाद प्रिया ने अनिल को मानने के लिए सारी हद तोड़ दी, और अनिल को विश्वास दिलाया की वो अनिल के ही साथ है, परीक्षा के दौरान अनिल,अजय,प्रिया और कुछ साथी मिल कर पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय अजय ने कुछ हिसाब करने के लिए कैलकुलेटर माँगा, और अनिल ने अपना मोबाइल कैलकुलेट करने के लिए अजय को दे दिया, जिसमे अजय ने अनिल और प्रिया की नंगी तस्वीरें देख ली,अजय चुप चाप कैलकुलेटर से हिसाब करके अनिल को वापस मोबाइल दे दिया,लेकिन आज उसका भ्र्म टूट चूका था,उसे विश्वास नहीं हो रहा था की प्रिया इस हद तक जा सकती है, उसका मन कर रहा था की वो आत्महत्या कर ले तभी उसके दिल ने उसे रोक दिया और उसे एहसास दिलाया की पढ़-लिख कर उसे बड़ा आदमी बनाना है, इसलिए वो चुप चाप फिर पढ़ने लगा और धीरे-धीरे प्रिया से दूर जाने लगा, लेकिन प्रिया को एहसास ना हो इसलिए वो पढ़ाई का मुद्दा बना कर रखता था, पढ़ाई की आड़ ले कर वो प्रिया से दूर जाने लगा,ये बात प्रिया को पता भी नहीं चला की कब अजय उसकी जिंदगी से दूर जा चूका था.कॉलेज खत्म होते ही अजय प्रिया की जिंदगी से निकल चूका था और अनिल की जिंदगी में भी दूसरी लड़की आ चुकी थी.और प्रिया अकेली हो गयी थी,क्योंकि ना उसकी जिंदगी में अजय था ना ही अनिल, आज जब उसे सच्चे प्यार की कमी खल रही थी ,तो उसके पास कोई नहीं था, उसकी समझ में प्यार का मतलब तब समझ में आया जब उसके पास कोई नहीं था,लेकिन आज तक उसे पता नहीं चल पाया की अजय उसकी जिंदगी से इतनी दूर क्यों चला गया,क्योंकि अजय कभी भी प्रिया से ना मिला ना ही बात की ना ही अपने बारे में कुछ ऐसा बताया,जिससे वो उसे ढूंढ पाती, सही कहा है किसी ने ये इश्क़ नहीं आसान, ये आग का दरिया है और इसमें डूब कर जाना है.प्रिया ने प्यार को प्यार नहीं समझा, एक समझौता माना,इसलिए तो उसे प्यार नसीब नहीं हुआ…so friends apko kya lagta story k bare me ..pyar me esa bhi hota h ya ye pyar hi nahi h........